मंडला में तैयार हुआ नाले के पानी का आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट, जबलपुर में भी हो ऐसा प्रयास

मंडला शहर की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है की नर्मदा उसे एक चंद्राकर आकर देती है जिसके चलते जिले का अधिकांश भाग नर्मदा के आस पास ही बसा हुआ है | लेकिन इसका नुकसान ये है की शहर की साडी गंदगी नर्मदा में बहा दी जाती है | नर्मदा में मंडला के 16 बड़े नाले मिलते है जो प्रदुषण को बढ़ा रहे है इसे ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक रूप से तीन नालो को एक साथ जोड़कर इंजीनियर दुष्यंत दुबे के मार्गदर्शन में इंटरसेफ्ट डायवर्सन करके नाले के शुद्धिकरण का काम किया गया | इस प्लांट की खासियत यह है की बिना बिजली और बिना केमिकल का उपयोग किये पानी को साफ़ करता है | यह अपने आप में मध्य भारत का पहला अनुपम प्रयोग है |

सराहनीय प्रयास

प्रारंभिक तौर पर मंडला में इसे तीन नालो को जोड़कर किया जा रहा है जिसके फायदे अभी से नज़र आने लगे है | इस प्लांट को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान तथा स्वक्षता अभियान के ओएसडी के द्वारा सराहा गया है | गंदे नाले के शुद्धिकरण का यह प्लांट प्रदेश ही नहीं पूरे मध्य भारत में इकलौता है | इंजीनियर दुष्यंत दुबे के इस प्रयास को प्रशासनिक अधिकारियो के आलावा पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़े लोग भी इसे एक नया और उपयोगी प्रयास बता रहे है |

डेरिया बना रही ज़हर

इंजीनियर दुष्यंत दुबे का कहना है की नालो से निकलने वाले पानी को तो स्वक्ष किया जा सकता है साथ ही साथ नर्मदा की क्षमता भी इतनी है की वह गंदे पानी को स्वतः ही साफ़ कर देती है लेकिन परियट और गौर के माध्यम से जो गोबर और भैंस की पेशाब नर्मदा में मिल रही है वह बड़ी घातक है और इन दोनों नदियों का आकार भी इतना है की इसके पानी को एक बार में साफ़ भी नहीं किया जा सकता यदि इस उपशिस्ट को रोका नहीं गया तो जल प्रदुषण के साथ साथ एंजोला पूरी तरह से नर्मदा को अपने आगोश में ले लेगा |

 

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